कागजों में चमकता विकास, जमीन पर अधूरे सपने,सिहावल में कमीशनखोरी के आरोपों से उठे सवाल


कागजों में चमकता विकास, जमीन पर अधूरे सपने,सिहावल में कमीशनखोरी के आरोपों से उठे सवाल
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से की जांच की मांग, निर्माण कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
राजबहोर केवट, सिहावल (सीधी)
सीधी जिले के सिहावल मुख्यालय क्षेत्र में विकास कार्यों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक ओर सरकारी फाइलों और कागजों में विकास योजनाएं पूरी होती दिखाई देती हैं, वहीं जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक विकास कार्यों की स्वीकृति और समीक्षा में पारदर्शिता का अभाव है और पूरा तंत्र “कमीशन” के इर्द-गिर्द संचालित हो रहा है। बिना स्थल निरीक्षण के ही निर्माण कार्यों को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे कई योजनाएं या तो अधूरी रह जाती हैं या फिर शुरू ही नहीं हो पातीं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़कों, नालियों, सामुदायिक भवनों सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन गांवों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कई स्थानों पर अधूरी सड़कें धूल उड़ाती नजर आती हैं, जबकि नालियों का निर्माण केवल कागजों तक सीमित है।
पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि “गांधी ब्रांड” यानी नकद लेन-देन के प्रभाव में वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
इतना ही नहीं, कूड़ेदान और कचरा पेटियों की खरीद को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर जरूरत न होने के बावजूद कूड़ेदानों की खरीद दिखाई गई, जबकि हकीकत में ये या तो उपयोग में नहीं हैं या फिर कहीं दिखाई ही नहीं देते।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सिहावल क्षेत्र में कराए गए सभी विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर का ध्यान आकर्षित
जिले के जिम्मेदार अधिकारियों, विशेष रूप से जिला कलेक्टर से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर पर जांच कराएं। यदि समय रहते पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो क्षेत्र में विकास कार्यों पर जनता का विश्वास पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और सिहावल को “कागजी विकास” से निकालकर वास्तविक विकास की दिशा में कब तक आगे बढ़ाया जाता है।
