जोखिम भरा काम, सुरक्षा गायब… और ऊपर से जिम्मेदारी से किनारा

जोखिम भरा काम, सुरक्षा गायब… और ऊपर से जिम्मेदारी से किनारा

उमरिया तपस गुप्ता(7999276090)

जिले बिरसिंहपुर पाली में स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में मंगलवार सुबह एक गंभीर हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। प्लांट की 210 मेगावाट इकाई में काम के दौरान फ्लैश लाइट की चपेट में आने से 45 वर्षीय अर्धकुशल श्रमिक सुशील दास बुरी तरह झुलस गए। बताया जा रहा है कि उनका चेहरा आग से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

घायल श्रमिक को तत्काल एमपीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने पर उन्हें श्रीराम अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल उनका उपचार जारी है। सुशील दास के.के. पावर कंपनी के माध्यम से ठेका श्रमिक के रूप में कार्यरत थे।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा इंतजामों पर खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हाई वोल्टेज कार्य में आर्क सूट और अन्य सुरक्षात्मक उपकरण अनिवार्य होते हैं। आरोप है कि श्रमिकों से जोखिम भरा काम तो कराया जाता है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते।

मामले को लेकर जब सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे से संपर्क किया गया तो पहले उन्होंने घटना की जानकारी से ही इनकार कर दिया। बाद में बिना सुरक्षा उपकरण काम कराने के सवाल पर उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उनका कहना था कि ठेकेदार को निर्देश दे दिए जाते हैं, यदि श्रमिक ने उपकरण नहीं पहना तो यह उसकी गलती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “मैं अकेला हूं, हजारों जगह काम चल रहा है, हर जगह खड़ा नहीं रह सकता।”

यह बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि यदि सुरक्षा अधिकारी ही जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लें तो श्रमिकों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या ठेका प्रणाली के नाम पर सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है?

यह पहली बार नहीं है जब इस विद्युत केंद्र में लापरवाही के आरोप लगे हों। पहले भी छोटे-बड़े हादसों की चर्चाएं सामने आती रही हैं। लेकिन हर बार जांच और सुधार के वादों के बीच मामला ठंडा पड़ जाता है।

श्रमिकों में इस घटना के बाद आक्रोश है। उनका कहना है कि जान जोखिम में डालकर काम करने के बावजूद सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जाती। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

अब निगाहें प्रबंधन और प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इस हादसे के बाद सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया जाएगा या फिर यह घटना भी फाइलों में दबकर रह जाएगी? मंगलवार की यह चिंगारी व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर गई है।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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