कमलेश्वर पटेल ने लगाए आरोप कहा अमेरिका के सामने झुक गई भारत सरकार

CWC सदस्य एवं पूर्व मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किया गया हालिया व्यापारिक समझौता देश के किसानों, कृषि अर्थव्यवस्था, वस्त्र उद्योग तथा भारत की आर्थिक संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और पूरी भाजपा सरकार अमेरिका के सामने नतमस्तक होकर भारत के किसानों और खेत खलिहान के हितों की बलि दे चुकी है।

वही उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के साथ मजबूती से खड़े होने के बजाय सरकार ने अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में खुली छूट देने का रास्ता खोल दिया है, जिससे देश के किसान आर्थिक संकट में धकेले जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह सरकार मजबूत है या मजबूर।

कमलेश्वर पटेल ने कहा कि 6 फरवरी 2026 के तथाकथित फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के प्रारंभिक बिंदुओं में ही भारत द्वारा अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों के लिए बिना आयात शुल्क बाजार खोलने की सहमति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि भारत में मक्का, ज्वार और सोयाबीन जैसी फसलें करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ी हैं, जबकि अमेरिका इनका अत्यधिक उत्पादन करता है। यदि ड्यूटी फ्री आयात होता है तो भारतीय किसानों की आय और बाजार दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।

जहा उन्होंने कहा कि सोयाबीन, मक्का और ज्वार का उत्पादन मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसी प्रकार कपास के मामले में भी स्थिति चिंताजनक है। बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हुए समझौते से भारतीय कपास और वस्त्र उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। यदि अमेरिकी कपास शुल्क मुक्त आयात होता है तो देश के कपास उत्पादक राज्यों के किसान गंभीर संकट में आ जाएंगे।

कमलेश्वर पटेल ने कहा कि फल उत्पादकों पर भी इस समझौते का सीधा प्रभाव पड़ेगा। सेब, नाशपाती, केला, संतरा सहित कई कृषि उत्पादों पर शुल्क मुक्त आयात से देश के बागवानी किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी।

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अब तक आनुवंशिक रूप से परिवर्तित कृषि उत्पादों के आयात को लेकर सावधानी बरतता रहा है, ताकि बीज विविधता और कृषि जैविक संतुलन सुरक्षित रह सके। यदि प्रोसेस्ड उत्पादों के माध्यम से ऐसे तत्व भारत में प्रवेश करते हैं तो इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन आवश्यक है।

श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि इस समझौते का एक गंभीर पहलू ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। यदि भारत पर रूस या अन्य देशों से कच्चा तेल खरीदने पर प्रतिबंध जैसी शर्तें लागू होती हैं और महंगा तेल खरीदने की बाध्यता पैदा होती है, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और जनता पर पड़ेगा। भारत ने पिछले वर्षों में रूस से तेल खरीदकर बड़ी आर्थिक बचत की है।

उन्होंने कहा कि नॉन टैरिफ ट्रेड बैरियर हटाने के नाम पर यदि भारतीय किसानों को मिलने वाली सीमित सहायता भी प्रभावित होती है, जबकि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, तो यह भारतीय कृषि पर वज्रपात होगा।

श्री पटेल ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भारत को लेकर लगातार सार्वजनिक बयान दिए जा रहे हैं, जिनमें भारत के निर्णयों को अपनी उपलब्धि बताया जा रहा है, जबकि भारत सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देश की गरिमा और सम्मान से जुड़ा विषय है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह समझौता बराबरी और राष्ट्रीय हितों के आधार पर हुआ है या दबाव में किया गया है। सरकार को देश के किसानों और जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के किसानों, श्रमिकों और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस विषय को जनता के बीच लेकर जाएगी।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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