जल संवर्धन योजना और चबूतरा निर्माण में गड़बड़ी के आरोप


जल संवर्धन योजना और चबूतरा निर्माण में गड़बड़ी के आरोप
चार खेत-तलावों सहित पंचायत के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
सीधी।
जनपद पंचायत सीधी के अंतर्गत ग्राम पंचायत ऐंठी में जल संवर्धन योजना के तहत कराए गए खेत-तलावों एवं चबूतरा निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर हुए कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
चार खेत-तलावों पर सवाल
ग्राम पंचायत क्षेत्र में वंश बहादुर बैगा, नियमबर सिंह, मुन्नी सिंह और बिहारी सिंह के खेतों में जल संवर्धन अभियान के तहत खेत-तलावों का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इन कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया।
आरोप है कि कुछ स्थानों पर पहले से मौजूद गड्ढों को ही खेत-तलाव दर्शाकर शासकीय राशि का आहरण कर लिया गया। साथ ही, कई स्थानों पर खुदाई की गहराई और निर्माण की गुणवत्ता योजना के उद्देश्य के अनुरूप नहीं पाई गई, जिससे वर्षा जल संचयन और सिंचाई सुविधा का अपेक्षित लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने इन कार्यों की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (एमबी) के सत्यापन तथा भुगतान विवरण की विस्तृत समीक्षा कराने की मांग की है।
चबूतरा निर्माण में 4 लाख खर्च पर विवाद
इसी ग्राम पंचायत में चबूतरा निर्माण कार्य में लगभग चार लाख रुपये व्यय दर्शाए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता और स्वरूप, खर्च की गई राशि के अनुरूप नहीं है।
इस मामले में निर्माण अवधि के दौरान पदस्थ रहे तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जल संवर्धन योजना और पंचायत निर्माण कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण विकास और संसाधनों का संरक्षण है। यदि इन कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता नहीं होगी, तो योजनाएं अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएंगी।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन का बयान
अपर कलेक्टर शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा है कि पंचायत क्षेत्र में स्वीकृत और क्रियान्वित सभी कार्यों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि यह जांच की जाएगी कि किन मदों में कार्य स्वीकृत हुए, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, तथा कहीं कार्य अपूर्ण या गुणवत्ता में कमी तो नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
