धन्ना सेठों के लिए सजी बस स्टैंड की दुकानें,टेंडर पर उठे गंभीर सवाल

IMG 20260321 111853 scaled News E 7 Live

धन्ना सेठों के लिए सजी बस स्टैंड की दुकानें,टेंडर पर उठे गंभीर सवाल

उमरिया तपस गुप्ता 

जिले के पाली नगर में साईं मंदिर के पास नवनिर्मित बस स्टैंड की दुकानों को लेकर नगर पालिका परिषद पाली अब सीधे कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। रोजगार के नाम पर बनाई गई इस योजना ने उल्टा असर दिखाया है और अब बाजार में खुलकर चर्चा हो रही है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार की गई है।

IMG 20260321 194737 News E 7 Live

नगर पालिका द्वारा जारी ई-टेंडर के मुताबिक बस स्टैंड परिसर की 13 दुकानों की प्रत्येक आरक्षित कीमत 32 लाख रुपये से शुरू होकर 44 लाख रुपये तक तय की गई है। इसके साथ ही 2.5 प्रतिशत अमानत राशि, जो 80 हजार से लेकर 1 लाख 12 हजार रुपये तक पहुंच रही है, और 5000 रुपये निविदा शुल्क भी रखा गया है। अंतिम तिथि 9 और 10 अप्रैल 2026 तय की गई है। कागजों में यह प्रक्रिया भले ही पारदर्शी बताई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

स्थानीय बेरोजगार युवाओं का साफ कहना है कि यह पूरा खेल उनकी पहुंच से बाहर है। उनका आरोप है कि इतनी ऊंची बोली और भारी अमानत राशि तय कर उन्हें पहले ही रेस से बाहर कर दिया गया है। एक बेरोजगार युवक ने कहा कि जब शुरुआत ही लाखों से हो रही है तो हम जैसे लोग फॉर्म भरने की सोचें भी कैसे यह योजना हमारे लिए नहीं है।

इधर बाजार में चर्चा और भी तीखी है। व्यापारी वर्ग और आम नागरिकों के बीच यह बात तेजी से फैल रही है कि यह टेंडर प्रक्रिया पहले से तय लोगों के हिसाब से बनाई गई है। कई लोग इसे सेटिंग का खेल तक कह रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों को इन शर्तों की जानकारी नहीं थी या फिर सब कुछ उनकी सहमति से ही हो रहा है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी अब शक को और गहरा कर रही है। नगर के लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ सही है तो जनप्रतिनिधि खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे आखिर वे यह क्यों नहीं बता रहे कि इतनी ऊंची कीमत तय करने का आधार क्या है।

स्थानीय युवाओं में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि नगर पालिका ने उनके सपनों के साथ खिलवाड़ किया है। जिन दुकानों को रोजगार का साधन बताया गया वही अब उनके लिए एक दूर का सपना बन गई हैं। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधि जनता की बजाय खास वर्ग के हितों को साधने में लगे हुए हैं।

इस बीच पाली कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष रवि मिश्रा ने भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, ई-टेंडर के नाम पर ऐसा जाल बिछाया गया है जिसमें केवल धन्ना सेठ ही फंसेंगे और लाभ उठाएंगे। गरीब और बेरोजगार युवाओं को तो पहले ही बाहर कर दिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।

उन्होंने आगे कहा कि जनप्रतिनिधि अगर सच में जनता के साथ हैं तो उन्हें इस प्रक्रिया को रोककर पुनर्विचार करना चाहिए। वरना जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।

हालांकि नगर पालिका प्रशासन अब भी नियमों और पारदर्शिता की बात कर रहा है, लेकिन जिस तरह से बाजार में चर्चाएं तेज हैं और लोगों का भरोसा डगमगाता नजर आ रहा है, उससे साफ है कि मामला केवल टेंडर तक सीमित नहीं रहेगा।

फिलहाल, बस स्टैंड की दुकानें रोजगार का जरिया बनने के बजाय नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनप्रतिनिधि इस बढ़ते आक्रोश को समझते हैं या फिर इसे नजरअंदाज कर मामला और भड़कने देते हैं।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button