धुआंवल देवी मंदिर में नौ दिवसीय अनुष्ठान भंडारे के साथ संपन्न


धुआंवल देवी मंदिर में नौ दिवसीय अनुष्ठान भंडारे के साथ संपन्न
चैत्र नवरात्रि के पर्व चल रहा था दुर्गा चालीसा एवं अखंड रामचरितमानस पाठ
संजय सिंह मझौली
नगर क्षेत्र मझौली के वार्ड क्रमांक 14 स्थित धुआंवल देवी(धूमावती) मंदिर मझौली अस्पताल की पीछे सदियों से लोक आस्था का केंद्र रहा है जहां चैत्र नवरात्रि के अवसर पर विगत 19 मार्च से अखंड दुर्गा चालीसा पाठ एवं रामचरितमानस पाठ जारी रहा जिसका समापन आज 27 मार्च रामनवमी तिथि को हवन एवं भंडारे के साथ हुआ।
गाजे बाजे के साथ हुआ जवारे का विसर्जन
निर्धारित तिथि रामनवमी के दिन मंदिर के पुजारी रमेश चतुर्वेदी जो विगत 19 मार्च (चैत्र नवरात्रि के प्रतिपदा) से अपने सिर एवं सीने में जवारे बोए हुए थे एवं देवी माता की पास भक्तों द्वारा जवारे बोए हुए थे सभी का पंचामृत से पूजन के बाद गाजे बाजे के साथ काली माता खप्पर के साथ देवी गीत के धुन पर नाचते हुए जवारे विसर्जन यात्रा देवी मंदिर से शुरू हुई जो तहसील मुख्यालय,थाना मुख्यालय एवं मुख्य बाजार से होते हुए मड़फहा देवी मंदिर में पहुंची जहां सभी जवारों का विसर्जन किया गया।फिर हवन के बाद भंडारा का कार्यक्रम दोपहर 2:00 बजे से शुरू किया गया जो देर शाम तक चलता रहा जहां क्षेत्र के श्रद्धालु एवं नगरवासी देवी माता का प्रसाद लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
अनुष्ठान के लिए शक्ति देती हैं देवी माता
मंदिर के पुजारी रमेश चतुर्वेदी जो नवरात्रि के अवसर पर 9 दिनों तक अखंड उपवास के साथ सीने में एवं सिर में जवारे उगाए हैं और उन्हीं जवारे को रामनवमी के दिन देवी को चढ़ाए हैं।भक्तों के मुताबिक मंदिर के पुजारी 9 दिन तक निराहार रह कर पूजा अनुष्ठान किए हैं और पूर्ण रूप से स्वस्थ भी हैं यह देवी माता का चमत्कार कहें या आशीर्वाद कहा जाए क्योंकि धूप के महीना में बिना अन्न जल के नौ दिनों का अनुष्ठान पूर्ण करना देवी माता की कृपा से ही संभव हो पाता है।
लगी रहती भक्तों की भीड़
शारदीय नवरात्रि एवं चैत्र नवरात्रि के अलावा भी हर समय उक्त मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है और लोग अपना कष्ट लेकर आते हैं देवी माता के शरण में गुहार लगाते हैं यह श्रद्धा कहा जाय याकि देवी माता की महिमा उनके कष्ट भी दूर होते हैं और मनोकामना पूर्ण होती हैं जिस कारण दिनों दिन लोगों की आस्था भी बढ़ती जाती है और देवी माता के नित नए चमत्कार भी देखने को मिलते हैं।
