मध्य प्रदेश में अब तक सिर्फ बालाघाट के ‘चिन्नौर’ धान और रीवा के ‘सुंदरजा’ आम को ही जीआई टैग

मध्य प्रदेश में अब तक सिर्फ बालाघाट के ‘चिन्नौर’ धान और रीवा के ‘सुंदरजा’ आम को ही जीआई टैग

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब तक सिर्फ दो खाद्य उत्पादों को ही जीआइ टैग प्राप्त है जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के माध्यम से बालाघाट की चिन्नौर धान और रीवा के सुंदरजा आम को ही जीआइ टैग मिला है।हालांकि सरकार जीआइ सेल परियोजना में बैगामी अरहर, नागदमन कुटकी, सिताही कुटकी, महाकौशल क्षत्रिय धान सहित लुचाई धान, ठर्री भरी धान और साठिया धान को भी जीआइ टैग दिलाने के प्रयास कर रही है।

कृषि मंत्री ने ये भी बताया

ये जानकारी विधानसभा में राघोगढ़ विधानसभा से कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सवाल के लिखित जवाब में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने दी है। कृषि मंत्री ने ये भी बताया कि इनमें से बैगामी अरहर, नागदमन कुटकी, सिताही कुटकी, महाकौशल क्षत्रिय धान को जीआइ रजिस्ट्री कार्यालय चैन्नई की अधिकारिक वेबसाइट पर विज्ञापित भी किया जा चुका है।

क्या होता है जीआइ टैग

किसी भी रीजन का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है उससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है जिसे जीआइ टैग यानी जीओ ग्राफिकल इंडीकेटर कहते हैं। जिसे हिंदी में भौगोलिक संकेतक नाम से जाना जाता है।

बालाघाट के 60, रीवा के 20 किसान पंजीकृत

प्रदेश में उत्पादित बासमती धान के लिए चिन्नौर के लिए वर्ष 2008 से प्रयास किए जा रहे थे। जीआइ टैग प्राप्त बालाघाट चिन्नौर धान उत्पाद के लिए 60 किसानों का समिति में पंजीकरण किया गया है। रीवा सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीकरण कराया गया।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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