सीधी में 2.5 लाख साल पुराने हाथियों के पूर्वजों के जीवाश्म मिले, प्रागैतिहासिक जीवन पर नई रोशनी

सीधी में 2.5 लाख साल पुराने हाथियों के पूर्वजों के जीवाश्म मिले, प्रागैतिहासिक जीवन पर नई रोशनी

सीधी जिला के सिहावल ब्लॉक स्थित कोरौली कला गांव की अतरैला पहाड़ी पर वैज्ञानिकों को लगभग ढाई लाख वर्ष पुराने हाथियों के पूर्वजों (प्रोबोसिडियन) के जीवाश्म मिले हैं। इस महत्वपूर्ण खोज ने क्षेत्र को प्रागैतिहासिक अध्ययन के लिए एक नए केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।

अवशेषों में क्या मिला

प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिक टीम को बड़े स्तनधारियों से संबंधित दांतों के टुकड़े, अस्थि खंड (हड्डियों के अवशेष) और डेंटिन जैसे महत्वपूर्ण जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। इन अवशेषों से संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में प्राचीन काल में विशालकाय जीवों का निवास रहा होगा।

वैज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है खोज

विशेषज्ञों के अनुसार, ये जीवाश्म लाखों वर्ष पहले के पर्यावरण, जलवायु और जीव-जंतुओं की जीवनशैली को समझने में मदद करेंगे। इससे यह भी पता लगाया जा सकेगा कि उस समय इस क्षेत्र की भौगोलिक और पारिस्थितिक परिस्थितियां कैसी थीं।

किसने किया सर्वेक्षण

यह खोज पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सतना की वैज्ञानिक टीम द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान सामने आई। टीम ने आगे विस्तृत अध्ययन और खुदाई की आवश्यकता भी जताई है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में व्यवस्थित उत्खनन किया जाए, तो और भी महत्वपूर्ण जीवाश्म मिल सकते हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप के प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने में अहम भूमिका निभाएंगे।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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