स्कूल के सामने ‘मौत का चूल्हा’,हाट बाजार में धड़ल्ले से जल रहे घरेलू गैस सिलेंडर


स्कूल के सामने ‘मौत का चूल्हा’,हाट बाजार में धड़ल्ले से जल रहे घरेलू गैस सिलेंडर
राजबहोर केवट सीधी सिहावल
भीड़भाड़ के बीच ‘आग से खेल’, जिम्मेदार बेखबर,हादसे का इंतजार?
एक तरफ आम जनता घरेलू गैस के लिए लाइन में खड़ी है, तो दूसरी तरफ स्कूल परिसर के सामने और हाट बाजार की भीड़ में ठेलों पर खुलेआम घरेलू गैस सिलेंडर धधक रहे हैं। नियमों की धज्जियां उड़ाते ये ठेले अब ‘चलती-फिरती बारूद’ बन चुके हैं।
हालात ऐसे हैं कि जहां बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए, वहीं उनके सिर पर हर वक्त हादसे का खतरा मंडरा रहा है। स्कूल के आसपास जलती आंच, लपटों के बीच से गुजरते मासूम और बाजार में उमड़ी भीड़ जरा सी चूक और सब कुछ राख में बदल सकता है।
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी गहरी ‘कुंभकर्णी नींद’ में डूबे हैं। ना कोई रोक, ना कोई टोक मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा हो।
क्या बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ ही सिस्टम की नई पहचान बन गई है?
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है ये खतरनाक खेल?
क्या किसी बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा?
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ये लापरवाही किसी दिन बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। अब देखना ये है कि जिम्मेदार जागते हैं या फिर ‘आग का ये खेल’ यूं ही चलता रहेगा।
