प्रशासनिक लापरवाही और “खंडहर” विवाद पर कार्रवाई,सीधी कलेक्टर हटाए गए, जाने आखिर क्या है पूरा मामला


प्रशासनिक लापरवाही और “खंडहर” विवाद पर कार्रवाई,सीधी कलेक्टर हटाए गए, जाने आखिर क्या है पूरा मामला
एमपी के सीधी जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों को “खंडहर” घोषित करने के विवाद ने आखिरकार बड़ा प्रशासनिक असर दिखाया। लगातार बढ़ते जनआक्रोश, अधिकारियों के विरोधाभासी रवैये और पीड़ितों की शिकायतों की अनदेखी के चलते कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी को पद से हटा दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आकस्मिक दौरे के दौरान स्थिति का जायजा लेने के बाद यह निर्णय लिया।
जाने कलेक्टर को क्यों हटाया गया
सीधी कलेक्टर को हटाने के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। वहीं लोगों ने बताया कि कलेक्टर का समाधान नहीं करते थे जनसुनवाई में कभी नहीं जाया करते थे। इसके अलावा उन्होंने कई ऐसे आदेश किए हैं जो कि नियम के विपरीत है जहां कलेक्टर ने श्री शहर के सभी शासकीय कार्यालय को आसपास के क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया है जिससे लोग अपनी समस्याओं को लेकर सीधी के किसी भी अधिकारी के पास अब नहीं जा सकते हैं जिसका लोगों ने जनप्रतिनिधियों ने विरोध किया था।
अब डीजे प्लाजा का विवाद और अधिक गहरा हो गया जहां लोगों के ऊपर प्लाजा के कर्मचारियों ने विवाद किया और फिर एक व्यक्ति के मकान को उठा दिया गया और जबरन अन्य मकानों को खाली करने के लिए प्रसार कर रहे थे जिसके बाद से आंदोलन शुरू हुआ विरोध इतना बड़ा की एसडीएम और कलेक्टर भी उनका सामना नहीं कर रहे थे।
वही एक ओर एसडीएम स्तर से जारी आदेश ने पूरे विवाद को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन समय रहते स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रहा। पीड़ितों द्वारा कलेक्ट्रेट में शिकायत, जनसुनवाई में गुहार और लगातार विरोध के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अब इसके अलावा, जब मामला सार्वजनिक हुआ और सोशल मीडिया पर पीड़ितों के भावुक वीडियो वायरल हुए, तब भी प्रशासन की ओर से संवेदनशील और स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। इससे जनता का भरोसा प्रशासन से कमजोर हुआ।
जहा सबसे बड़ा कारण यह रहा कि स्थानीय स्तर पर मकान तोड़े जाने, लोगों को धमकाए जाने और अवैध कार्रवाई के आरोपों के बावजूद प्रभावी रोक नहीं लगाई गई। इससे शासन की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा और सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर को हटाना “डैमेज कंट्रोल” के रूप में लिया गया निर्णय माना जा रहा है।
अब स्थानीय निवासी बादल विश्वकर्मा के अनुसार, “हम लोग बेहद परेशान थे और मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। उन्होंने हमारी बात सुनी और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद कलेक्टर को हटा दिया गया, लेकिन हमें सिर्फ यही नहीं चाहिए हमारे टूटे घरों का मुआवजा और दोषियों पर एफआईआर भी जरूरी है।”
एनएसयूआई प्रदेश सचिव विक्रांत सिंह ने कलेक्टर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे आम जनता की शिकायतें सुनने में गंभीर नहीं थे और डीजे प्लाजा मामले में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनके मुताबिक, बढ़ते दबाव और विरोध के चलते यह निर्णय “डैमेज कंट्रोल” के रूप में लिया गया।
अब इधर, शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने भी कार्रवाई को अधूरा बताते हुए कहा कि जब तक संबंधित एसडीएम और घटना में शामिल अन्य लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।
जाने क्या है पूरा घटनाक्रम
अब पूरा मामला सीधी शहर के वार्ड क्रमांक 4 से जुड़ा है, जहां डीजे प्लाजा निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हुआ। 12 फरवरी को गोपद बनास एसडीएम राकेश शुक्ला ने इलाके के कई मकानों को “खंडहर” घोषित कर दिया, जबकि ये मकान 2017-18 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे।
वही इस आदेश के बाद कथित रूप से कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर मकानों को खाली कराने और तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। एक मकान गिरा दिया गया और अन्य मकानों पर भी खतरा मंडराने लगा। 7 परिवारों के 58 लोग प्रभावित हुए और भय का माहौल बन गया। मकानों के आसपास गहरी खुदाई कर दी गई, जिससे हालात और खतरनाक हो गए।
जहा स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकाया गया, गाली-गलौज की गई और जबरन मकान खाली कराने का दबाव बनाया गया।
अब मामला बढ़ने पर जब एसडीएम राकेश शुक्ला मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने अपने ही आदेश से इनकार कर दिया और कहा कि अंतिम निर्णय कोर्ट करेगा। यहां तक कि गिरे हुए मकान को भी उन्होंने नकार दिया, जिससे विवाद और गहरा गया।
इसके बाद बड़ी संख्या में लोग जनसुनवाई में पहुंचे, जहां महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की।
वही नगर पालिका के सब इंजिनियर आकाश उदैनिया ने भी स्पष्ट किया कि इतने कम समय में मकानों को खंडहर घोषित करना उचित नहीं है। एक मकान की लाइफ कम से कम 40 से 50 साल की होती है।
