मां की मौत से अब मां बनने तक का सफर,संघर्ष की अनोखी कहानी

संजय टाइगर रिजर्व की बाघिन T54,संघर्ष से सफलता तक की रोमांचक कहानी

इस जंगल की खामोशी में भी कई कहानियां सांस लेती हैं… कुछ दर्द से भरी, तो कुछ उम्मीद और जीत की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है संजय टाइगर रिजर्व की बाघिन T54 की, जिसने संघर्षों के बीच अपनी पहचान बनाई और आज सफलता की नई कहानी लिख दी।

इस कहानी की शुरूआत होती है दिसंबर 2020 से, जब बाघिन T3 के दो मासूम शावकों को ब्यौहारी बफर क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया। दोनों मादा शावकों को सुरक्षित रखने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के एनक्लोजर में रखा गया। जंगल की आज़ादी से दूर, इन शावकों के लिए यह एक नई और चुनौतीपूर्ण जिंदगी की शुरुआत थी।

जहा करीब एक साल बाद, 2 दिसंबर 2021 को इन्हें फिर से जंगल में बसाने की योजना बनी। एक शावक को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा गया, जबकि दूसरी को संजय टाइगर रिजर्व के मोहन रेंज में छोड़ा गया। यही शावक आगे चलकर T32 के नाम से जानी गई।

वक्त बीतता गया और साल 2022 में T32 ने दो शावकों को जन्म दिया। जंगल में जीवन फिर से सामान्य होता दिख रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 12 मार्च 2023 को T32 की अचानक मौत हो गई। दो छोटे शावक अनाथ हो गए… जंगल में उनका बच पाना लगभग असंभव था।

जहा ऐसे में वन विभाग की टीम ने 17 मार्च 2023 को दोनों शावकों का रेस्क्यू किया और उन्हें दुबरी टाइगर एनक्लोजर में सुरक्षित रखा। यही वो मोड़ था, जहां से एक नई कहानी जन्म ले रही थी।

वही समय के साथ, इन शावकों में से एक मादा बाघ T54 के रूप में विकसित हुई। जून 2024 में उसे रेडियो कॉलर लगाकर बस्तुआ क्षेत्र में छोड़ा गया। यह सिर्फ एक रिहाई नहीं थी, बल्कि एक परीक्षा थी—क्या वह जंगल में खुद को स्थापित कर पाएगी?

जिसके करीब दो वर्षों की लगातार निगरानी, सुरक्षा और संघर्ष के बाद T54 ने पोंडी और बस्तुआ क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। उसने साबित कर दिया कि वह सिर्फ जीवित ही नहीं, बल्कि पूरी तरह सक्षम भी है।

और फिर आया मार्च 2026 जब जंगल में तीन नन्हे कदमों के पगमार्क दिखे। यह संकेत था कि T54 अब मां बन चुकी है। हालांकि शावकों को अभी कैमरे में कैद नहीं किया जा सका है, लेकिन उनकी मौजूदगी ने पूरे वन विभाग में खुशी की लहर दौड़ा दी।

वही शुक्रवार सुबह हुए स्वास्थ्य परीक्षण में भी T54 पूरी तरह स्वस्थ पाई गई। एसडीओ सुधीर मिश्रा के अनुसार, यह सफलता वर्षों की मेहनत, सतत निगरानी और समर्पण का परिणाम है।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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