पुस्तक मेला बना मजाक निराश लौटे अभिभावक व विद्यार्थीv


पुस्तक मेला बना मजाक निराश लौटे अभिभावक व विद्यार्थी
संजय सिंह मझौली
मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के आदेशानुसार दो दिवसीय”पुस्तक मेला”जिला मुख्यालय सहित जिले के सभी विकास खण्डों में 5 एवं 6 अप्रैल 2026 को आयोजित करने के आदेश जारी किए गए थे उसी क्रम में मझौली विकासखंड में पुस्तक मेले का आयोजन शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मझौली में 5 अप्रैल को नगर परिषद मझौली के अध्यक्ष शंकर प्रसाद गुप्ता के मुख्य आतिथ्य में एवं तहसीलदार दिलीप सिंह, सहायक संचालक कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी बी डी रावत एवं बीआरसीसी अयोध्या प्रसाद पटेल के उपस्थिति में शुभारंभ किया गया जहां शिक्षा विभाग के अधिकारी,कर्मचारी एवं ग्रामीण अभिभावक व स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
लेकिन जब क्षेत्रीय अविभावक एवं विद्यार्थी सामग्री क्रय करने मेला में पहुंचे तो महज खाना पूर्ति के नाम पर दो-तीन व्यापारी कुछ सामग्री लेकर आए थे जिस कारण खरीददारी करने वाले निराश होकर वापस लौटे और शाम होते होते सिर्फ विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे ना तो दुकान संचालित रहीं और ना ही विद्यार्थी एवं अभिभावक देखे गए जिससे यही कहा जा सकता है कि मेला का आयोजन मजाक बनकर रह गया।
बताते चलें कि विकासखंड स्त्रोत समन्वयक अयोध्या प्रसाद पटेल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी गई थी जिसमें कहा गया है कि कार्यालय कलेक्टर के पत्र क्रमांक 1886 दिनांक 3 अप्रैल 2026 के परिपालन में विकासखंड अंतर्गत शासकीय मॉडल उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय मझौली में दो दिवसीय पुस्तक मेला 5 एवं 6 अप्रैल को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित किया जा रहा है।
मेले से शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थी एवं अभिभावक स्टेशनरी पुस्तकें,कापियां,यूनिफॉर्म, टाई,जूते,मोजे स्कूल बैग एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री उचित एवं प्रति स्पर्धात्मक दरों पर क्रय कर सकेंगे। इसी उद्देश्य को लेकर मेले का आयोजन किया जा रहा है।विकासखंड क्षेत्र के शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की गई थी कि इस पुस्तक मेले में पहुंच कर उचित एवं प्रति स्पर्धात्मक दरों पर सामग्री क्रय कर मेले का लाभ उठाएं।
लोगों द्वारा उठाए गए सवाल
मेले से वापस लौट रहे लोगों द्वारा विभाग के ऊपर कई तरह के सवाल उठाए कि जब व्यापारियों से सामग्री विक्रय के समय में अंतिम समझौता हो जाता तब मेला आयोजित किया जाना चाहिए जिसमें भरपूर सामग्री उपलब्ध रहती। अगर ऐसा नहीं था तो मेले के संबंध में बिना तैयारी के विज्ञापन जारी कर हम लोगों को क्यों गुमराह किया गया?धूप एवं काम के महीना में हम ग्रामीण छोटे-छोटे बच्चों को लेकर मेला पहुंचे और निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
इनका कहना
मेले के संबंध में सोशल मीडिया में शेयर की गई खबर पढ़कर आया था लेकिन यहां ना तो ज्यादा व्यापारी दिखे और जो व्यापारी थे उनके पास मांग के मुताबिक सामग्री भी नहीं थी इसलिए निराश होकर वापस लौटना पड़ा।धूप और काम के सीजन में 20 किलोमीटर दूर से आया था अगर तैयारी नहीं थी तो मेले को लेकर ढिंढोरा क्यों पीटा गया।
राम लखन सिंह गंजरी
जिस तरह मेले में आने के लिए विभाग द्वारा विज्ञप्ति जारी की गई थी उस हिसाब से ना तो व्यापारी आए और ना ही सामग्री मिली। खाली हाथ वापस लौटना पड़ा बच्चे भी निराश हैं।
गीता केवट जमुआ नंबर 01
100 रुपए किराया देकर बच्चों के लिए किताब कॉपी और सामग्री खरीदने मेला में आई थी लेकिन यहां सिर्फ खाना पूर्ति के हिसाब से मेला आयोजित किया गया है सामग्री नहीं मिली।
ललिता कोरी जोबा
विभाग एवं जिला प्रशासन के द्वारा जारी आदेश का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। उसी के तहत मेले के संबंध में विज्ञापन जारी किया गया था और व्यापारियों से मेले में आने के लिए चर्चा भी की गई थी लेकिन सभी व्यापारी नहीं आए हैं जिसके संबंध में खंड प्रशासन को अवगत कराया गया है और उपखंड अधिकारी के द्वारा पुस्तक विक्रेताओं को नोटिस भी जारी की गई है संभव है कि कल सभी व्यापारी आएंगे। अभी शिक्षा सत्र शुरू हुआ है इसलिए व्यापारियों के पास नई शिक्षा सत्र की सामग्री भी पूरी नहीं है।
अयोध्या प्रसाद पटेल बीआरसी मझौली
