RTI सिस्टम को रफ्तार देने की तैयारी,मध्य प्रदेश में दो नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तय

RTI सिस्टम को रफ्तार देने की तैयारी,मध्य प्रदेश में दो नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तय
मध्य प्रदेश में सूचना का अधिकार (RTI) व्यवस्था को मजबूत और तेज बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जहा राज्य सरकार ने आलोक नागर और राजेश भट्ट को राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त करने का निर्णय लिया है। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह नियुक्तियां औपचारिक रूप से लागू हो जाएंगी, जिससे लंबे समय से लंबित पड़े मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
दरअसल, मध्य प्रदेश में राज्य सूचना आयोग में अधिकतम 10 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी तक सभी पद भरे नहीं गए थे। वर्तमान में मुख्य सूचना आयुक्त विजय यादव सहित कुल चार आयुक्त कार्यरत हैं। सरकार ने आयोग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करते हुए छह नए पदों पर नियुक्ति की पहल की थी, जिसमें से तीन पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किया गया था।
वही सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने इस दिशा में तेजी दिखाई है, क्योंकि प्रदेश में 23 हजार से अधिक RTI अपीलें लंबित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच हुई बैठक में इन दोनों नामों पर सहमति बनी, जिसके बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ।
जहा अगर बात करें आलोक नागर की, तो वे मध्य प्रदेश शासन में फर्म एवं सोसायटी विभाग के पूर्व रजिस्ट्रार रह चुके हैं। इस विभाग में रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक कार्यों और नियामकीय प्रक्रियाओं का व्यापक अनुभव हासिल किया है। उनकी नियुक्ति से आयोग को प्रशासनिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजेश भट्ट आकाशवाणी भोपाल के पूर्व कार्यक्रम प्रभारी रहे हैं। वे रेडियो प्रसारण, उद्घोषणा और जनसंचार के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। भोपाल और उज्जैन केंद्रों में कार्य करते हुए उन्होंने जनसंपर्क और सूचना के प्रभावी संप्रेषण का अनुभव हासिल किया है, जो आयोग के कामकाज में सहायक साबित हो सकता है।
वही इन नियुक्तियों के बाद राज्य सूचना आयोग में आयुक्तों की संख्या बढ़कर सात हो जाएगी, जिससे RTI मामलों की सुनवाई और निपटारा तेजी से हो सकेगा। खास बात यह है कि सरकार ने इस बार पारंपरिक प्रशासनिक और पत्रकारिता पृष्ठभूमि से हटकर विविध अनुभव वाले लोगों को मौका दिया है।
जहा कुल मिलाकर, यह नियुक्तियां न केवल लंबित मामलों को कम करने में मदद करेंगी, बल्कि प्रदेश में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी मजबूत बनाएंगी। इसे लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
