नियम सिखाने निकले, खुद ही कटघरे में, उमरिया आरटीओ की चेकिंग पर बड़ा बवाल

IMG 20260411 WA0015 News E 7 Live

नियम सिखाने निकले, खुद ही कटघरे में, उमरिया आरटीओ की चेकिंग पर बड़ा बवाल

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले में आरटीओ विभाग इन दिनों अपनी ही कार्यशैली को लेकर कठघरे में खड़ा नजर आ रहा है। सड़क पर वाहन चालकों को नियमों का पालन कराने निकले कर्मचारी खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखे, और जब सवाल उठे तो जवाब देने के बजाय दबाव बनाने की कोशिशें सामने आईं। एक वायरल वीडियो ने पूरे सिस्टम की परतें खोलकर रख दी हैं।

वीडियो में आरटीओ कर्मचारी वाहन चेकिंग करते नजर आते हैं। एक वाहन चालक को रोका जाता है, दस्तावेज मांगे जाते हैं, लेकिन तभी कहानी पलट जाती है। चालक सीधे सवाल दागता है कि जिस गाड़ी से चेकिंग हो रही है, वह खुद प्राइवेट नंबर की है, उसमें टैक्सी परमिट नहीं है और पीछे नंबर प्लेट तक नहीं लगी। यानी जो नियम आम जनता पर लागू किए जा रहे हैं, वही नियम खुद अमल में नहीं हैं।

IMG 20260411 WA0015 News E 7 Live

चालक की सीधी मांग थी पहले अपनी गाड़ी का चालान काटिए, फिर मेरी गाड़ी देखिए। इस एक सवाल ने पूरी कार्रवाई की पोल खोल दी। आरोप है कि इसके बाद नियमों की बात करने वाले कर्मचारी कानून की भाषा छोड़कर दबाव की भाषा पर उतर आए। थाने ले जाने की धमकी, गाड़ी की फोटो खींचकर देख लेने जैसी चेतावनी यह सब उस सिस्टम का चेहरा दिखाता है जो खुद को कानून का रखवाला बताता है।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। नियम साफ कहते हैं कि वाहन चेकिंग के दौरान अधिकृत अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य है और चालान केवल POS मशीन के जरिए होना चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती दिख रही है। सवाल यह है कि क्या उमरिया में नियम किताबों तक सीमित हैं और सड़क पर सिर्फ मनमर्जी चल रही है?

जब इस पूरे मामले पर चेकिंग में शामिल कर्मचारी गब्बर सिंह से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें वीडियो वायरल होने की जानकारी नहीं है। लेकिन उनके जवाब खुद कई नए सवाल खड़े कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि आगे नंबर प्लेट लगी थी, पीछे की प्लेट शायद निकल गई होगी और गाड़ी में रखी थी। यानी जिस वाहन से कानून लागू कराया जा रहा था, वह खुद अधूरा था।

IMG 20260411 WA0011 News E 7 Live

टैक्सी परमिट पर उनका तर्क था कि आवेदन हो चुका है, लेकिन सिस्टम में अभी दिखाई नहीं दे रहा। सवाल यह है कि जब तक परमिट जारी न हो, तब तक वाहन किस अधिकार से उपयोग में लाया जा रहा था?

अधिकारी की अनुपस्थिति पर उन्होंने कहा कि ऊपर से आदेश था और हर जगह अधिकारी मौजूद नहीं रह सकते। लेकिन क्या आदेश नियमों से ऊपर हो सकते हैं? अगर हर कर्मचारी अपने स्तर पर चेकिंग करने लगे तो जवाबदेही किसकी होगी?

POS मशीन को लेकर भी दिलचस्प दलील दी गई बैटरी खत्म हो जाए तो रसीद कट्टा से चालान काटा जाता है। यानी डिजिटल सिस्टम फेल हो तो पुराने तरीके से वसूली जारी रहेगी। यह इमरजेंसी का तर्क कितनी बार इस्तेमाल होता है, यह भी जांच का विषय है।

अवैध वसूली के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज किया और रिकॉर्ड मेंटेन होने की बात कही। लेकिन सवाल फिर वही अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो वीडियो में दिख रही स्थिति इतनी संदिग्ध क्यों है?

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आरटीओ कार्यालय में कुछ कर्मचारी ही पूरे सिस्टम को संचालित कर रहे हैं और चेकिंग अभियान उनके इशारों पर चलते हैं। अगर ऐसा है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सीधा सवाल है।

अब सबसे बड़ा सवाल आरटीओ अधिकारी राम दुबे की भूमिका पर उठ रहा है। क्या उन्हें इस पूरी स्थिति की जानकारी है, या फिर उनकी निगरानी में ही यह सब हो रहा है? अगर कर्मचारी नियमों से बाहर जाकर कार्रवाई कर रहे हैं, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही?

यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का है जिसमें नियम सिर्फ जनता के लिए हैं और सिस्टम खुद को उससे ऊपर मानता है। उमरिया में उठे इस विवाद ने साफ कर दिया है कि अगर समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो कानून पर भरोसा कमजोर होना तय है। अब देखना यह है कि कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह धूल खाता रह जाएगा।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button