सिहावल में सियासी संग्राम का शंखनाद, 27 फरवरी को SDM कार्यालय पर कांग्रेस का घेराव

सिहावल में सियासी संग्राम का शंखनाद, 27 फरवरी को SDM कार्यालय पर कांग्रेस का घेराव

राजबहोर केवट, सिहावल (सीधी)

सीधी/सिहावल, 23 फरवरी। सिहावल विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। 27 फरवरी 2026 को सिहावल स्थित एसडीएम कार्यालय के समक्ष कांग्रेस द्वारा विशाल धरना-प्रदर्शन और घेराव की घोषणा की गई है। इस आंदोलन का नेतृत्व अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य एवं मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल करेंगे।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सिहावल के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन को लेकर क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन आमजन की समस्याओं को लेकर प्रशासन को जगाने का प्रयास है।

प्रमुख मुद्दे होंगे केंद्र में

कांग्रेस नेताओं के अनुसार धरना-प्रदर्शन में क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। इनमें शामिल हैं—

बिजली संकट: ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती, लो-वोल्टेज की समस्या और बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर नाराजगी।

पेयजल व्यवस्था: कई गांवों में पेयजल संकट, हैंडपंप खराब होने तथा नल-जल योजनाओं के अधूरे क्रियान्वयन का मुद्दा।

सड़कें बदहाल: प्रमुख मार्गों से लेकर ग्रामीण सड़कों तक जर्जर स्थिति, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है।

भ्रष्टाचार के आरोप: विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और योजनाओं में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल।

स्वास्थ्य सुविधाएं: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी, दवाइयों का अभाव तथा मरीजों को जिला मुख्यालय रेफर किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति।

शिक्षा व्यवस्था: शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अधूरी आधारभूत सुविधाएं और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता।

बेरोजगारी: स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी और भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब।

किसानों की समस्याएं: फसल का उचित मूल्य, खाद-बीज की उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें।

“जनता की आवाज बुलंद होगी”

पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि यह आंदोलन किसी दल विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों के लिए है। उन्होंने दावा किया कि हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम नागरिक एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रशासन से जवाब मांगेंगे।

ब्लॉक कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन दिए गए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण अब सड़क पर उतरना मजबूरी बन गया है।

प्रशासन अलर्ट

आंदोलन की घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया है। संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

सियासत में नया मोड़?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन सिहावल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। अब देखना होगा कि 27 फरवरी को होने वाला यह घेराव जनसमर्थन के किस स्तर तक पहुंचता है और क्या इससे क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल होती है।

फिलहाल सिहावल में सियासी तापमान चरम पर है और 27 फरवरी का दिन राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button