NEET पेपर लीक का कहर: डॉक्टर बनने का सपना टूटा, होनहार छात्रा आकांक्षा ने लगाई फांसी

20260603 183139 News E 7 Live

NEET पेपर लीक का कहर: डॉक्टर बनने का सपना टूटा, होनहार छात्रा आकांक्षा ने लगाई फांसी

पापा का कर्ज उतारूंगी…” कहने वाली बेटी ने हार मान ली

मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। डॉक्टर बनने का सपना आंखों में संजोए एक होनहार छात्रा ने कथित तौर पर NEET पेपर लीक से आहत होकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली। देवतालाब विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मगनिया निवासी 20 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है। परिवार का आरोप है कि NEET परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद आकांक्षा पूरी तरह टूट गई थी।

आकांक्षा नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी। परिवार के मुताबिक उसने इस बार परीक्षा बहुत अच्छी दी थी और उसे पूरा विश्वास था कि उसका चयन हो जाएगा। परीक्षा देकर लौटने के बाद वह बेहद खुश थी और घरवालों से बार-बार कह रही थी कि उसका पेपर शानदार गया है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पेपर लीक की खबरों ने उसकी उम्मीदों को गहरे सदमे में बदल दिया।

अब दोबारा पेपर देने की हिम्मत नहीं

आत्महत्या से पहले आकांक्षा ने एक भावुक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। उसने लिखा—

“मम्मी-पापा आपको भरोसा था कि आपकी बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर। पहले पेपर में अच्छे मार्क्स आने की उम्मीद थी, लेकिन अब दोबारा अच्छा पेपर होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया।”

इस नोट ने सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि देशभर के उन लाखों छात्रों की पीड़ा सामने ला दी है, जो सालों की मेहनत और सपनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

किसान पिता ने कर्ज लेकर बेटी को पढ़ाया

मृतका के चाचा दद्दी प्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि आकांक्षा बचपन से ही पढ़ाई में बेहद तेज थी। उसकी पूरी शिक्षा नागपुर में हुई, जहां उसके पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी पिछले लगभग 20 वर्षों से खाना बनाने का काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है, लेकिन पिता ने बेटी के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। आकांक्षा डॉक्टर बनना चाहती थी और पिता ने उसकी इच्छा पूरी करने के लिए हर संभव कोशिश की। NEET की तैयारी और कोचिंग के लिए परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से लोन लिया, रिश्तेदारों से उधार लिया और कई बार अपनी जरूरतों तक का त्याग किया।

परिजनों के मुताबिक बेटी की पढ़ाई पर करीब 15 लाख रुपए तक का कर्ज हो चुका था। आकांक्षा इस बात को अच्छी तरह समझती थी। वह अक्सर कहती थी कि डॉक्टर बनकर सबसे पहले पिता का कर्ज चुकाएगी और परिवार की जिम्मेदारी संभालेगी।

दिन-रात पढ़ती थी, आराम करने को कहते थे

चाचा दद्दी प्रसाद ने बताया कि आकांक्षा बेहद मेहनती और होनहार छात्रा थी। वह घंटों पढ़ाई करती रहती थी। माता-पिता उसे आराम करने की सलाह देते थे, लेकिन वह अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत में जुटी रहती थी।

उन्होंने बताया कि NEET परीक्षा देने के बाद आकांक्षा काफी खुश थी। उसे भरोसा था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा। लेकिन पेपर लीक की खबर आने के बाद उसका व्यवहार बदलने लगा। उसने खाना-पीना कम कर दिया था और लोगों से बातचीत भी लगभग बंद कर दी थी। वह अंदर ही अंदर तनाव और निराशा में डूबती चली गई।

परिवार का कहना है कि उसे लगने लगा था कि यदि परीक्षा दोबारा हुई तो परिवार उसकी तैयारी और खर्च नहीं उठा पाएगा। यही चिंता धीरे-धीरे उसके मनोबल को तोड़ती चली गई।

पिता को तीन बार आ चुका हार्ट अटैक

परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहद खराब थी। आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी हृदय रोग से पीड़ित हैं और उन्हें तीन बार हार्ट अटैक आ चुका है। उनके इलाज में भी लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

आकांक्षा अपने पिता की तकलीफ और परिवार की हालत को बहुत करीब से समझती थी। शायद यही वजह थी कि वह परिवार पर और बोझ नहीं बनना चाहती थी। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक दबाव ने उसे इतना कमजोर कर दिया कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।

अस्पताल ले गए, लेकिन बच नहीं सकी

परिवार को घटना की जानकारी दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मिली। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, इस उम्मीद में कि शायद उसकी सांसें चल रही हों, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और कानूनी कार्रवाई पूरी की गई।

20 मई को हुई इस घटना के बाद 21 मई को नागपुर में पोस्टमार्टम कराया गया। अगले दिन 22 मई को आकांक्षा का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव मगनिया लाया गया, जहां पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। उसी दिन उसका अंतिम संस्कार किया गया।

आकांक्षा अपने पीछे माता-पिता, एक छोटे भाई और को छोड़ गई है। उसका छोटा भाई राज चतुर्वेदी नागपुर में ही कक्षा 9वीं का छात्र है।

घटना के बाद गरमाई सियासत

इस दर्दनाक घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार से फोन पर परिजनों की बात कराई। उमंग सिंगार ने परिवार को हर संभव आर्थिक और कानूनी मदद का भरोसा दिया।

वहीं NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिनोद जाखड़, पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े और प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे समेत कई नेताओं ने गांव पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। NSUI की ओर से परिवार को तत्काल 2.5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। साथ ही परिवार पर चढ़े कर्ज को चुकाने में मदद का आश्वासन भी दिया गया है।

“कब रुकेगा छात्रों की मौतों का सिलसिला?”

आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर देश की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने मेहनती छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है। लाखों युवा दिन-रात मेहनत कर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन सिस्टम की खामियों का सबसे बड़ा खामियाजा वही भुगत रहे हैं।

मऊगंज की होनहार बेटी आकांक्षा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत ने पूरे देश से एक सवाल जरूर पूछा है— आखिर कब तक छात्रों के सपनों की कीमत उनकी जिंदगी होगी?

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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