क्या सीधी जिले के थाना प्रभारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते?

 

सीधी जिले की एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि बिना किसी एफआईआर और बिना किसी गंभीर अपराध के, उसे शाम 6:00 बजे फोन करके जबरन थाने बुलाया गया। महिला का कहना है कि उसे रात 12:00 बजे तक थाने में बैठाकर रखा गया और इस दौरान उसके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया गया।

महिला का कहना है कि वह अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों को घर पर छोड़कर थाने पहुँची थी, जबकि उसका पति दूसरे प्रदेश में मजदूरी करता है। देर रात थाने से निकलने के बाद वह पैदल चलते हुए लगभग रात 2:00 बजे अपने घर पहुँची, जहाँ उसके छोटे-छोटे बच्चे रोते हुए मिले।

इन आरोपों की सत्यता थाने के सीसीटीवी फुटेज से भी जांची जा सकती है, जिससे यह स्पष्ट हो सकता है कि महिला किस समय थाने पहुँची और किस समय उसे जाने दिया गया।

इन घटनाओं की शिकायत लेकर महिला सीधे पुलिस अधीक्षक के पास पहुँची है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या सीधी जिले के थाना प्रभारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते? यदि महिला के आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?

जनता निष्पक्ष जांच और न्याय की अपेक्षा करती है।

 

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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