नेतागिरी की आड़ में रेत का खेल! मंच पर जनसेवा, नदी में अवैध उत्खनन का कारोबार

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नेतागिरी की आड़ में रेत का खेल! मंच पर जनसेवा, नदी में अवैध उत्खनन का कारोबार

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जनता के बीच विकास, पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन की बातें करने वाले कुछ कथित राजनीतिक चेहरे इन दिनों खुद सवालों के घेरे में हैं। घुनघुटी क्षेत्र में मानसून काल के दौरान रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद अवैध खनन और ट्रैक्टरों से रेत परिवहन का सिलसिला लगातार जारी रहने की चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे खेल में सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ प्रभावशाली नेताओं का संरक्षण होने के कारण कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि दिन हो या रात, नदी-नालों से ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिन नेताओं को सरकारी कार्यक्रमों में मंत्री और अधिकारियों के साथ मंच साझा करते देखा जाता है, उन्हीं पर अब अवैध रेत कारोबार को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि यदि कानून सबके लिए समान है, तो फिर राजनीतिक रसूख रखने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।

दरअसल, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइन-2016 के तहत मानसून अवधि में रेत उत्खनन पर रोक का स्पष्ट प्रावधान है। इसी के पालन में उमरिया कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने आदेश जारी करते हुए 30 जून 2026 की मध्यरात्रि से 1 अक्टूबर 2026 तक जिले की सभी रेत खदानों, नदी-नालों और घाटों में खनन कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया है। आदेश में सभी संचालकों को इसका कड़ाई से पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इसके बावजूद घुनघुटी क्षेत्र में कथित रूप से ट्रैक्टरों से रेत ढुलाई जारी रहने की बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई छिपा हुआ कारोबार नहीं है। जिन रास्तों से ट्रैक्टर गुजरते हैं, वहां आम लोग रोज उन्हें देखते हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि आम नागरिकों को यह गतिविधियां दिखाई दे रही हैं, तो संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों तक इसकी जानकारी क्यों नहीं पहुंच रही, या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

क्षेत्र में चर्चा है कि अवैध उत्खनन करने वाले कुछ लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि कार्रवाई की आशंका लगभग खत्म हो चुकी है और रेत माफिया बेखौफ होकर प्रतिबंध अवधि में भी नदी-नालों का सीना चीरने में लगे हुए हैं। इससे न केवल शासन के आदेशों की अनदेखी हो रही है, बल्कि पर्यावरण और नदी तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में प्रतिबंध का पालन कराना चाहता है, तो घुनघुटी क्षेत्र में अचानक निरीक्षण कर ट्रैक्टरों की जांच की जाए। यदि अवैध परिवहन की पुष्टि होती है, तो केवल वाहन जब्त करने तक सीमित न रहकर इस पूरे नेटवर्क के पीछे खड़े प्रभावशाली लोगों की भी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कार्रवाई करेगा, या फिर प्रतिबंध केवल सरकारी आदेशों और फाइलों तक ही सीमित रहेगा? घुनघुटी की नदियां इस सवाल का जवाब आने का इंतजार कर रही हैं।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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