जिला शिक्षा केंद्र में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर फैली भ्रांतियां, तथ्य आए सामने

IMG 20260601 WA0018 News E 7 Live

जिला शिक्षा केंद्र में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर फैली भ्रांतियां, तथ्य आए सामने

उमरिया जिले के जिला शिक्षा केंद्र में सहायक परियोजना समन्वयक (मोबिलाइजेशन) एवं सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) की व्यवस्थाओं को लेकर हाल ही में विभिन्न माध्यमों से प्रसारित खबरों के संबंध में वास्तविक तथ्यों की जानकारी सामने आई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार संबंधित पदों पर किसी प्रकार की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है, बल्कि कार्यालयीन कार्यों की सुचारू व्यवस्था एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अस्थायी रूप से जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

जानकारी के अनुसार सहायक परियोजना समन्वयक (मोबिलाइजेशन) का पद लगभग दो वर्षों से रिक्त है। इस दौरान उक्त कार्य का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारी के पास था, जिनके पास दिव्यांग छात्रावास सहित अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी थे। कार्यभार अधिक होने के कारण शाखा के कार्य प्रभावित हो रहे थे। इसी स्थिति को देखते हुए अनुभवी अधिकारी की सहमति एवं पूर्व अनुभव के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से अनुमोदन प्राप्त किया गया और व्यवस्था बनाई गई।

इसी प्रकार सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) का अतिरिक्त प्रभार भी कार्यालयीन आवश्यकता के कारण सौंपा गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था स्वर्गीय संतोष कुमार गौतम के आकस्मिक निधन के बाद बनाई गई, जबकि पूर्व में भी वित्त शाखा का प्रभार अतिरिक्त व्यवस्था के रूप में ही संचालित किया जाता रहा है।

सूत्रों के मुताबिक दोनों व्यवस्थाएं वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान एवं स्वीकृति के बाद स्थापना शाखा द्वारा की गई हैं। कुछ खबरों में यह आरोप लगाया गया कि उक्त आदेश लेखा शाखा अथवा लेखापाल के प्रभाव में जारी किए गए हैं, जबकि संबंधित प्रक्रिया में लेखा शाखा की कोई भूमिका नहीं रही है।

वहीं जेम पोर्टल के माध्यम से की जाने वाली खरीदी को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी विभागीय पक्ष का कहना है कि यह कार्य एमआईएस शाखा के माध्यम से संचालित होता है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत संपादित किया जाता है। छात्रावास के लेखापाल प्रभार संबंधी व्यवस्था भी राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं पत्रों के अनुरूप की गई है।

विभागीय सूत्रों का दावा है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा अधूरी अथवा भ्रामक जानकारी के आधार पर समाचार प्रकाशित कराए गए, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हुई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर किसी भी प्रकार की जानकारी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button