विकास पुरुषों की विकास गाथा या बदहाली की दास्तां?सिहावल मुख्यालय की तस्वीरें खोल रही हैं विकास के दावों की पोल

विकास पुरुषों की विकास गाथा या बदहाली की दास्तां?सिहावल मुख्यालय की तस्वीरें खोल रही हैं विकास के दावों की पोल

सीधी/सिहावल। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के सिहावल विधानसभा क्षेत्र में विकास के बड़े-बड़े दावों की हकीकत ज़मीनी तस्वीरों में साफ़ दिखाई दे रही है। सिहावल मुख्यालय पहुंच मार्ग से लेकर सरकारी परिसरों और ग्राम पंचायतों तक बदहाल सड़कें, जलभराव, जर्जर भवन, पेयजल संकट और अव्यवस्थाओं का आलम लोगों के सामने है।

बारिश की पहली फुहार में ही मुख्य मार्ग तालाब में तब्दील हो जाता है। जगह-जगह गड्ढों और जलभराव से राहगीरों व वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, महिला एवं बाल विकास विभाग का भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और अन्य सरकारी भवन जर्जर अवस्था में खड़े हैं। कई स्थानों पर छत का प्लास्टर गिर चुका है और सरिए तक बाहर दिखाई दे रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।

हालात सिर्फ भवनों तक सीमित नहीं हैं। पेयजल व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। कई स्थानों पर हैंडपंप और जल स्रोत बदहाल पड़े हैं, जबकि आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन संस्थानों से बच्चों के भविष्य की नींव रखी जाती है, उन्हीं आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बदतर क्यों है? विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि विकास के दावों और धरातल की हकीकत में कितना बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इन समस्याओं पर कब तक संज्ञान लेते हैं या फिर जनता यूं ही बदहाली झेलती रहेगी।

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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