इंदवार पुलिस के लिए पहेली बना बंटी ताम्रकार, 21 दिन से फरार


इंदवार पुलिस के लिए पहेली बना बंटी ताम्रकार, 21 दिन से फरार
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के इंदवार थाना परिसर से पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ संदेही बंटी ताम्रकार 21 दिन बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। 20 मई 2026 को हुई इस घटना ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरारी के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अब तक फरार संदेही को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
लूटकांड की जांच में सामने आया था नाम
जानकारी के अनुसार, 10 मई को पाली थाना क्षेत्र के घुनघुटी अंतर्गत ग्राम चौरी में एक सराफा व्यापारी से लाखों रुपये की लूट हुई थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सत्यम बसदेवा निवासी कटनी और नागेश बसदेवा निवासी ग्राम चिमटा, जिला उमरिया को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने इंदवार थाना क्षेत्र के ग्राम पलझा में हुई एक अन्य लूट में भी शामिल होने की बात स्वीकार की थी।
इसी जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर कटनी जिले के बरही निवासी बंटी ताम्रकार को पूछताछ के लिए इंदवार थाने लाया गया था। पुलिस को संदेह था कि वह लूट और चोरी का सामान खरीदने के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
पुलिस को चकमा देकर हुआ था फरार
20 मई को पूछताछ के दौरान बंटी ताम्रकार पुलिस को चकमा देकर थाना परिसर से फरार हो गया था। घटना सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल आसपास के क्षेत्रों में तलाश अभियान चलाया गया, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल सका।
मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस विभाग ने तत्कालीन थाना प्रभारी विजय पाटले, सब इंस्पेक्टर अमर बहादुर सिंह और एएसआई सूर्य बहादुर सिंह को निलंबित कर दिया था। विभागीय जांच भी शुरू की गई थी।
10 जून तक नहीं मिला कोई सुराग
घटना के लगभग 21 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच सकी है। फरार संदेही की गिरफ्तारी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि थाना परिसर से भागा आरोपी आखिर पुलिस की पकड़ से इतनी दूर कैसे है।
वर्तमान टीआई बोले, आरोपी अब भी फरार
मामले को लेकर इंदवार थाना प्रभारी नंदलाल धुर्वे ने बताया कि बंटी ताम्रकार अभी भी फरार है। उसकी तलाश लगातार जारी है
हालांकि, 21 दिन बाद भी आरोपी का गिरफ्त में न आना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस फरार संदेही तक कब पहुंच पाती है।
