कलेक्टर के निर्देश हवा में, चुरहट अस्पताल की बदहाल व्यवस्था

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कलेक्टर के निर्देश हवा में, चुरहट अस्पताल की बदहाल व्यवस्था

सीधी जिले के चुरहट स्थित 50 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर के निरीक्षण और सुधार के निर्देश के तीन महीने बाद भी अस्पताल में गंदगी, पेयजल संकट, ईसीजी और जांच सुविधाओं का अभाव, ऑक्सीजन की कमी और सुरक्षा व्यवस्था जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। मरीजों को सरकारी अस्पताल की बजाय निजी लैब और अस्पतालों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

29 मार्च को कलेक्टर विकास मिश्रा ने चुरहट अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। अस्पताल परिसर में गंदगी, बदहाल शौचालय और पेयजल की कमी मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा रही है।

अस्पताल में ईसीजी मशीन उपलब्ध नहीं है। पैथोलॉजी जांच भी नियमित रूप से नहीं हो रही है। ऑक्सीजन सिलेंडरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों और निजी पैथोलॉजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ लैब टेक्नीशियन सरकारी अस्पताल की बजाय निजी लैब में अधिक समय देते हैं, जिससे सरकारी जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं ओपीडी में फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को दवा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

बिजली कटने पर जनरेटर का उपयोग नहीं किए जाने से भी मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर अतिक्रमण और परिसर में असामाजिक तत्वों व नशेड़ियों का जमावड़ा सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। मरीजों के परिजन, खासकर महिलाएं, खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल की उच्चस्तरीय जांच कर लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. अशोक खरे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सीधी “चुरहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं की जानकारी मिली है। मैं स्वयं अस्पताल का निरीक्षण करूंगा। निरीक्षण के बाद आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

बहरहाल अब बड़ा सवाल यही है कि जब कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं, तो आखिर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कब मिलेंगी? क्या इस बार निरीक्षण के बाद हालात बदलेंगे या फिर व्यवस्था सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी?

Pragati Pandey

मैं प्रगति पांडे एक फ्रेशर मीडिया जर्नलिस्ट हूं। ट्रैवल बीट पर आर्टिकल्स लिखना मेरी स्पेशलाइजेशन है। इसके अलावा मुझे उन रोचक चीजों के बारे में पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं मास कम्यूनिकेशन से ग्रैजुएट हूं, लिखने के अलावा मुझे एक्टिंग करना और कविताएं लिखना बेहद पसंद है।

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