सीधी जिले में पिछले 1 वर्ष में 53 महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हुई।


कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पिछले 1 वर्ष में 53 महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हुई।
ये महिलाएं किसी दुर्घटना में नहीं मरीं
किसी युद्ध की शिकार नहीं हुईं
ये महिलाएं मां बनते हुए दुनिया छोड़ गईं।
कारण क्या था?
कई अस्पतालों में डॉक्टर नहीं थे
विशेषज्ञों की भारी कमी थी
कई गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा था
और सबसे दर्दनाक सच…
कुछ गांवों में गर्भवती महिलाओं को खाट (चारपाई) पर उठाकर 2–3 किलोमीटर तक ले जाया जाता था, ताकि वे एंबुलेंस तक पहुंच सकें।
जरा सोचिए…
एक तरफ हम विश्व शक्ति बनने की बात करते हैं,
और दूसरी तरफ एक मां को अस्पताल पहुंचने के लिए चार लोगों के कंधों का सहारा लेना पड़ता है।
मामला इतना गंभीर हुआ कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को हस्तक्षेप करना पड़ा और राज्य सरकार को नोटिस जारी करना पड़ा।
सवाल सिर्फ 53 मौतों का नहीं है…
अगर एक मां को समय पर इलाज नहीं मिल सकता,
तो आम आदमी के जीवन की कीमत आखिर कितनी है?
यह राजनीति नहीं, मानवता का सवाल है।
आपकी राय क्या है?
क्या ऐसी मौतों के लिए सिर्फ सिस्टम जिम्मेदार है या हम सबकी चुप्पी भी?
